गैस सेफ्टी डिवाइस :————-

आई जी टी द्वारा निर्मित यह एक ऐसा डिवाइस है, जिसमे आग लगने और जान माल के नुकसान का खतरा नहीं है | आज के आधुनिक दौर में हर घर एल॰ पी॰ जी॰ गैस कनेक्शन पहुंच चुका है। जो कि बदलते दौर में सही और जरुरी भी है। आधुनिक चीजों से तीव्र गति से सभी कार्य हो जाने के लाभ बहुत है लेकिन कुछ नुकसान और खतरे भी तीव्र गति से बढ़ रहे है। एल॰ पी॰ जी॰ गैस के उपयोग करने में कुछ लापरवाही हो जाती है, जिसकी वजह से दुर्घटना हो जाती है। जैसे चूल्हे का स्विच खुला रह जाना। पाइप लाइन में छेद या कट लग जाने से गैस का बहार निकलना जिससे आग लगने का हादसा हो जाता है। लेकिन इस डिवाइस के लगे रहने पर ऐसी कोई भी घटना होने पर गैस कि सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है। और सबसे खास बात यह है कि जीतनी गति से गैस को छोड़ा जाना चाहिए होता है, आम रेगुलेटर उस गति से भी ज्यादा तीव्रता से गैस छोड़ता है । जिसके कारण काफी मात्रा में गैस बर्बाद होती है, जबकि बर्नर से लौ उतनी ही जलती है । जीतनी छमता होती है ।जबकि यह डिवाइस उतनी तेजी से गैस भेजता है जीतनी बर्नर कि छमता को आवश्य्कता होती है, जिससे गैस कि बचत होती है। और खास बात आम रेगुलेटर कि अपेक्षा इस डिवाइस को लगाने से 30 दिन चलने वाली गैस 40 दिन चलती है | और साथ ही साथ पांच साल की वारंटी भी है, और यदि कोई दुर्घटना हुई तो 9 से 10 करोड़ तक का दुर्घटना बीमा जो कि बजाज एलिअन्स की तरफ से है, वह भी मुहैया करवाना |

यूपाटोरियम परफोलिटुम 200 :—————-

आज के दौर में मच्छरों के प्रकोप से कई घातक बीमारियाँ फैली हुई है । जिसमे प्रमुख डेंगू , मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियाँ है। उसकी रोकथाम में मच्छरों से बचाव कि सलाह के साथ यह दवा दो बूंद देने पर इस बीमारी से बचाव हो सकता है। यह दवा एंटी डोज़ का काम करती है,जो कि कई बड़े होमियोपैथी के डॉक्टरों कि सलाह पर है।

सीलिशिया :———-

बिच्छु, मधुमक्खी, ततैया, बरैया, जैसी डंक वाले कीड़े के काटने पर भी कभी दर्द, सूजन, चुभन एवं सुन्नता जैसी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। इसमें कीड़े अपने डंक को अंदर छोड़ देते है । जो जहर को फैलते है। जिसमे दर्द काफी होता है। इस दवा
कि दो- दो बूंद जीभ पर डालने से दर्द में आराम होता है, डंक अपने आप बाहर आ जाता है। सुई चुभ कर टूटने, कांटा और शीसा चुभने पर भी यह काम करता है।

नाजा 200 :——-

भारत देश में कुल 550 प्रजातियों के साँप पाए जाते है। जिसमे से मात्र 10 प्रजातियों के साँप जहरीले होते है। जिनके कटाने से इंसान कि मृत्यु हो सकती है । अधिकतर लोग साँप के जहर से नहीं बल्कि भय से अटैक आने पर मर जाते है। यह दवा ऐसी है, जिसकी दो बूंद जीभ पर डालने से कितना भी जहरीला साँप जैसे कोबरा भी काटे तो इंसान की जान बच जाती है ।

हाइड्रोफोबिनम :——

सड़क पर आते जाते या कई बार घर पर पाले हुए कुत्ते के काटने पर काफी रक्त श्राव, दर्द और सूजन होती है। और कई बार पागल कुत्ते के काटने से रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी कि सम्भावना हो जाती है। लेकिन इस दवा के दो बूंद जीभ पर डालने से रेबीज का खतरा टल जाता है। दर्द में तुरंत आराम और सूजन ख़त्म रक्त श्राव भी बंद हो जाता है।